भारत में 300 से अधिक जनजातियां हैं; भील, गोंड, मुंडा, उरांव, सहरिया, बैगा, कोरकू, संथाल, मीणा, बंजारा, खारिया, भूमिया, और कई अन्य, जिन्होंने सदियों से प्रकृति धर्म को जीवित रखा है। ये जनजातियाँ वृक्षों, नदियों, पर्वतों, पशुओं और पंचमहाभूतों की आराधना करती हैं। किंतु यही प्रकृति एवं देव धर्म संकट में है। इस संकट के … Continue reading जनजातीय संस्कृति पर संकट: बिरसा मुंडा की आज फिर क्यों है जरूरत? कैसे 300 से अधिक जनजातियां ईसाई मिशनरियों के निशाने पर
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