क्या कर्म ही सबसे बड़ा है?

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि केवल “कर्म” नहीं, बल्कि धर्मयुक्त कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है। अगर कर्म के साथ धर्म नहीं जुड़ा है, तो वह कर्म अधर्म की ओर ले जा सकता है। शास्त्रों में भी यही कहा गया है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, यही धर्म है। धर्म … Continue reading क्या कर्म ही सबसे बड़ा है?