हमारे यहां कुटुम्ब में सद्गुणों के आदान हेतु एक वैदिक प्रार्थना है- तेजोऽसि तेजो मयि धेहि। वीर्यमसि वीर्यं मयि धेहि। बलमसि बलं मयि धेहि। ओजोऽस्योजो मयि धेहि। मन्युरसि मन्युं मयि धेहि। सहोऽसि सहो मयि धेहि।। (यजुर्वेद 19-9) अर्थात्-‘हे परमेश्वर, आप तेज स्वरूप हैं अत: हमारे अंदर तेज स्थापित कीजिए। हे प्रभु, आप पौरुषवान हैं अत: … Continue reading तेजोमय जीवन का वैदिक दर्शन
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