रक्तरंजित सरयू से दीप प्रज्ज्वलित सरयू तक

 22 जनवरी को श्रीरामलला मंदिर से लौटे। सरयू जी को प्रणाम कर, आचमन कर, सरयू जी की परमपावन माटी प्रसाद रूप में एकत्र कर मैं उसके तट पर खड़ा ही रह गया, शब्दहीन था मैं, मन शब्दातीत। दृश्य अनिर्वचनीय। कालजयी सरयू के समक्ष मैं क्या कहूं? इसने सिया राम-लखन लाल का वनवास देखा, रावण विजय … Continue reading रक्तरंजित सरयू से दीप प्रज्ज्वलित सरयू तक