जम्मू-कश्मीर में पहले से ही "बी टीम" की भांति काम कर रही कांग्रेस की स्थिति गठबंधन सरकार में और भी दयनीय हो गई है। कारण है कि कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, जिसका स्वाभाविक लाभ सत्ता का नेतृत्व कर रही नेशनल कान्फ्रेंस को मिल रहा है। इस गुटबाजी के कारण ही कई प्रकार के आरोप सामने आने लगे हैं जिनमें सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण करने, सम्पत्ति जुटाने तथा भ्रष्टाचार जैसे आरोप शामिल हैं। कुछ समय पूर्व प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने सरकार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जनहित के विषयों को उभारना शुरू कर दिया था, जिनमें क्षेत्रीय भेदभाव और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने की बातें भी शामिल थीं। राज्य के कुछ बड़े नेताओं ने यह भी कहना शुरू कर दिया था कि गठबंधन सरकार का नेतृत्व तीन वर्ष पूरा होने पर कांग्रेस को मिलना चाहिए। कुछ कांग्रेसी नेताओं ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के विलय सम्बन्धी विवादित बातों को "बच्चे जैसी हरकतें" भी बताया था।
कांग्रेसी नेताओं के इन वक्तव्यों से नेशनल कान्फ्रेंस के नेतृत्व में नाराजगी दिखाई दी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने भी कह दिया कि उनकी सरकार उनके ही नेतृत्व में 6 वर्ष की अवधि पूरी करेगी।
यह चर्चा अभी जारी ही थी कि जम्मू में गांधी जी का बलिदान दिवस मनाने के क्रम में कांग्रेस के दो बड़े गुटों ने अपनी-अपनी अलग रैलियों का आयोजन कर डाला। एक ओर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज के नेतृत्व में रैली हुई जिसमें केन्द्रीय प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने के लिए उर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे पहुंचे तो दूसरी ओर "गांधी ग्लोबल फैमिली" के नाम से आयोजित विरोधी खेमे के समारोह का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री तथा केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने किया और नेशनल कांन्फ्रेंस का समर्थन प्राप्त करने के लिए यह भी स्पष्ट घोषणा कर दी कि वर्तमान गठबंधन सरकार के गठन के समय बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाने का कोई प्रस्ताव ही नहीं था, इसलिए उमर अब्दुल्ला ही 6 वर्ष तक नेतृत्व करते रहेंगे।
गुलाम नबी आजाद की नेशनल कान्फ्रेंस के नेताओं की इस नजदीकी ने प्रो. सोज के समर्थकों को विचित्र स्थिति में ला दिया। इसके बाद न केवल मंत्रियों तथा कुछ अन्य कांग्रेसियों के विरुद्ध तरह-तरह के अनुशासनहीनता के आरोप समाचार पत्रों में छपने लगे बल्कि प्रो. सोज को कई तरीकों से घेरने की कोशिशें शुरू हो गईं। यहां तक कि उनकी पत्नी का नाम भी एक कथित घोटाले के साथ जोड़ा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के गत कुछ समय से अपने चुनावी घोषणा पत्र के आधार पर पंचायतों तथा नगर निकायों को आधिकारिक बनाने के लिए भारतीय संविधान के 73वें तथा 74वें संशोधन के आधार पर इस राज्य में भी चुनाव कराने की मांग को जोर-शोर से उठाया। कुछ समय पूर्व प्रो. सैफुद्दीन सोज ने यहां तक कहा कि इन संशोधनों को लागू किए बिना इन मूल लोकतांत्रिक इकाईयों के चुनाव अर्थहीन होंगे। किन्तु गुलाम नबी आजाद सहित केन्द्र के कुछ और बड़े नेताओं की शह पाकर नेशनल कान्फ्रेंस का नेतृत्व अपनी ही सोच के आधार पर पंचायतों के चुनाव करवाने के लिए आगे बढ़ रहा है और कांग्रेस के नेताओं में चल रही गुटबाजी और केन्द्रीय हस्तक्षेप के कारण राज्य के बड़े नेता भी अब चुप्पी साधने लगे हैं।
इस गुटबाजी का एक और बड़ा उदाहरण तब सामने आया कि जब गत दिनों गृहमंत्री चिदम्बरम् के यहां पहुंचने पर प्रदेश अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज के नेतृत्व में मिलने की बजाय विरोधी गुट ने अलग से भेंट की और बहुत कुछ ऐसा कहा जो प्रदेश इकाई की सोच से भिन्न था। कहा जा रहा है कि केन्द्रीय नेतृत्व ने आंतरिक और बाहरी दबाव के चलते कश्मीर समस्या के समाधान के लिए अलगाववादियों और अद्र्ध अलगाववादियों को शांत करने के लिए घड़ी की सुईयों को पीछे घुमाने का मन बना लिया है। इस सम्बंध में जिन सुझावों पर विचार हो रहा है उनमें राज्य में राज्यपाल की बजाय फिर से लोकतांत्रिक संवैधानिक प्रमुख को सदर-ए-रियासत के साथ मुख्यमंत्री का नाम बदल कर प्रधानमंत्री करना शामिल है। इस सम्बंध में वार्ताकारों की सिफारिशों को भी आधार बनाया जा रहा है।
किन्तु प्रश्न यह है कि क्या यह सुझाव प्रदेश कांग्रेस, विशेषकर जम्मू के कांग्रेसियों को स्वीकार होंगे? श्री चिदम्बरम् जब जम्मू आए तब कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ इस विषय पर लम्बी बातचीत भी की। किन्तु जम्मू के कांग्रेसियों ने गृहमंत्री को स्पष्ट रूप से कह दिया कि 1953 से पूर्व की स्थिति उन्हें स्वीकार नहीं होगी। अत: चिदम्बरम् को इन कांग्रेसियों से कहना पड़ा कि वह नए विचारों के साथ समस्या के राजनीतिक समाधान की रूपरेखा तैयार करें। इसी बीच कश्मीर घाटी में स्वायत्तता के नारे लगाने वालों ने पूरी आजादी की मांग करने वालों को यह कहकर शान्त करना शुरू कर दिया कि जो कुछ मिलता है, वह तो प्राप्त कर लिया जाए, फिर आगे की मांग करेंगे। द
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