गंगा की प्रमुख सहायक नदी भागीरथी पर लोहारीनाग पाला जलविद्युत परियोजना एनटीपीसी द्वारा बनाई जाने वाली भारत सरकार की परियोजना थी। परंतु सरकार को पर्यावरणविदों और गंगाभक्त हिन्दू समाज के तीखे विरोध के आगे झुकते हुए 600 मेगावाट बिजली की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता वाली इस परियोजना को अंतत: रद्द करना पड़ा। एक अनुमान के अनुसार, एनटीपीसी अब तक इस परियोजना पर लगभग 600 करोड़ रु.व्यय कर चुकी थी और 2000 करोड़ रु. आगे के कार्यों के लिए निर्धारित किए जा चुके थे। गत मार्च में सरकार की ओर से तीन मंत्रियों-वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे- की समिति प्रस्तावित 381 मेगावाट और 480 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली दो परियोजनाओं क्रमश: भैरोंघाटी और पाला मनेरी परियोजनाओं को निरस्त कर चुकी थी।
लोहारीनाग पाला परियोजना को निरस्त करने के साथ ही सरकार ने गोमुख से उत्तरकाशी के बीच 135 किमी. के क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण कानून 1986 के तहत "ईको-सेंसिटिव जोन" यानी ऐसा संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया है जिसमें किसी भी तरह के विकास कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोहारीनाग पाला परियोजना के तहत अब तक हुए निर्माण को हटाने और क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बचाने के प्रयासों को सुनिश्चित करने के लिए एक तकनीकी समिति बनाई जाएगी।
गंगा की पवित्रता बनी रहे... गंगा पर करोड़ों भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण विश्व के लोगों की आस्था है। अत: प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह इसकी पवित्रता को बनाये रखने के लिए हरसंभव सहयोग करे, जिससे सामाजिक-आर्थिक संतुलन बना रहे। -स्वामी रामदेव
गंगा हर भारतवासी की मां है। मां को अगर कष्ट हो तो पुत्र चैन से कैसे बैठ सकता है? इसलिए गंगा पुत्रों को गंगा की पवित्रता को बनाये रखने के लिए हर आहुति देने को तैयार रहने की आवश्यकता है। गंगा सदैव निर्मल बनी रहे, ऐसा प्रयास देश की तमाम राज्य सरकारों को करना चाहिए।
-के.एन. गोविन्दाचार्य प्रख्यात स्वदेशी चिंतक
हम गंगा को मां से भी अधिक पूजते हैं। हरिद्वार से आगे गंगा की स्थिति चिंतनीय है। गंगा की रक्षा करना प्रत्येक भारतवासी का नैतिक कर्तव्य एवं जिम्मेदारी है।
-राजेन्द्र सिंह सदस्य, राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण
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