हरियाणा सरकार ने सरस्वती नदी के पुनरुत्थान के लिए 10.05 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें से 3.75 करोड़ रुपये अब तक इस कार्य के लिए व्यय किये जा चुके हैं। यह जानकारी गत 15 सितम्बर को चंडीगढ़ में एक प्रस्तुतिकरण के दौरान इस प्राचीन नदी के पुनरुत्थान के लिए किये जा रहे कार्यों की प्रगति के संबंध में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को अवगत कराते हुए दी गई। यह प्रस्तुतिकरण सरस्वती नदी शोध संस्थान द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस अवसर पर सरस्वती नदी शोध संस्थान की ओर से संस्थान के अध्यक्ष श्री दर्शन लाल जैन, महासचिव सुश्री कुमुद आर.बंसल तथा अन्य सदस्य उपस्थित थे।
सरस्वती नदी शोध संस्थान की ओर से बताया गया कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आदि बद्री से पिपली तक सरस्वती क्रीक, जो आज नाले में परिवर्तित हो चुकी है, का नाम बदलकर सरस्वती नदी रजबहा किया गया है तथा यह सुनिश्चित करने के प्रबंध किये जा रहे हैं कि इस धारा में गंदा पानी न गिरे। पुराने "क्रीक" में सीवर के पानी को जाने से रोकने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने पिपली से एसवाईएल नहर के "साइफन" तक एक अलग सीवर के निर्माण के लिए 10.60 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है। इस सीवर शोधन संयंत्र की स्थापना के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास विचाराधीन है।
प्राचीन नदी का उद्गम जिला यमुनानगर में शिवालिक श्रृंखला की तलहटी में आदि बद्री के आस-पास माना जाता है। यह बताया गया कि आदि बद्री से ज्योतिसर तक "एसवाईएल" नहर "साइफन" के निकट पवित्र सरस्वती नदी की लंबाई लगभग 125 किलोमीटर है। आगे जिला यमुनानगर के गांव थाना छप्पर में नदी का 93 किलोमीटर लंबा "क्रीक" है और यह गांव उचाना चंदाना-झीनवरहेडी-जण्डोला-बीर-पिपली-नरकाटरी के निकट से गुजरती है, जो जिला यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में हैं। वर्तमान "एसवाईएल" के अंतर्गत वह "साइफन" और नरवाना प्रखंड की नहरों से होते हुए जिला कुरुक्षेत्र की बीबीपुर झील तक मार्ग बना रही है। आदि बद्री से उचाना चंदाना तक 42 किलोमीटर लंबे छोटे नाले के रूप में एक प्राकृतिक "क्रीक" मौजूद है। उचाना चंदाना से राष्ट्रीय राजमार्ग तक 63 किलोमीटर लंबी पुरानी "क्रीक" को 200 क्यूसेक की क्षमता वाले सरस्वती नदी रजबहा के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। सरस्वती नदी की 63 किलोमीटर लंबाई में खुदाई की गई है, उस 4.5 किलोमीटर के विस्तार को छोड़कर, जहां 17.92 एकड़ भूमि अभी अधिग्रहीत की जानी है। यह पता लगाया गया है कि ज्योतिसर के बाद प्राचीन "क्रीक" का पारगमन मौजूदा बीबीपुर झील, पेहवा के क्षेत्र में सरस्वती की पतली धारा से होते हुए है और तत्पश्चात यह चीका क्षेत्र से होती हुई जिला कैथल के गांव खारका के निकट पारा नदी में विलीन हो जाती है और पंजाब क्षेत्र में घग्घर से मिल जाती है। ज्योतिसर से लेकर पंजाब क्षेत्र तक सरस्वती नदी की कुल लंबाई लगभग 60 किलोमीटर है।
सरस्वती नदी शोध संस्थान से चर्चा के समय हरियाणा के सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय यादव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव छतर सिंह, ओएनजीसी तथा हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, हिसार के अधिकारी तथा अन्य कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। द चंडीगढ़ से दिनेश कुमार
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