अन्न ही नहीं, तंत्र भी सड़ गया है
भारतीय जनता पार्टी के एक केन्द्रीय प्रतिनिधिमण्डल ने हरियाणा के इस्माइलाबाद (कुरुक्षेत्र) एवं करनाल में खराब हो रहे गेहूं का जायजा लेने के लिए इस क्षेत्र का दौरा किया। इस दल ने पाया कि देश में चारों ओर गेहूं सड़ रहा है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। भण्डारण के नियमों को ताक पर रखने के कारण ही गेहूं सड़ रहा है। इससे लगता है कि सरकार एवं प्रशासन जानबूझकर गेहूं को बर्बाद करने पर तुले हैं। इससे भी ज्यादा दु:ख की बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना करके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कृषि मंत्री शरद पवार गरीबों के पेट भरने के लिए गोदामों में सड़ रहे गेहूं को गरीबो में मुफ्त बांटने में संकोच कर रहे हैं।
इस केन्द्रीय दल में भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जाबड़ेकर, सांसद नवजोत सिंह सिद्धू, दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डा.हर्षवर्धन, कैप्टन अभिमन्यु, किरीट सोमैया सहित कृष्ण बजाज एवं कृष्ण बेदी उपस्थित रहे। प्रकाश जाबड़ेकर ने कहा कि देश का अन्नदाता किसान भारी मुश्किल के बाद खेतों मे अन्न उगाता है पर जब रख-रखाव की बात आती है तो सरकारी तंत्र नाकाम हो जाता है और सही प्रकार से उस अन्न का भण्डारण नहीं कर पाता। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि यह गोदामों में गेहूं नही सड़ रहा है बल्कि भारत का शासन तंत्र सड़ रहा है। जो सरकार गरीबों की हिमायती होने की बात करती है उसे गरीबों के पेट भरने के लिए मुफ्त में गेहूं बांटना भी अच्छा नहीं लगता। उन्होंने कहा कि एफसीआई व डीएफसी ने किसी भी नियम का पालन नहीं किया जिससे इस्माइलाबाद में गेहूं की कई हजार बोरियां खुले में खराब हो रही हैं जबकि करनाल में मेरठ रोड पर बन्द गोदाम में भी गेहूं सड़ गया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की नाकामी है जिसको लेकर भाजपा शुरू से ही संवेदनशील है लोकसभा में भी इसके लिए आवाज उठाई गई है और आगे भी चुप बैठने का सवाल नहीं है। जब तक गरीब लोगों की अनदेखी होती रहेगी, भाजपा उनके साथ खड़ी नजर आएगी। नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि कब तक झूठे वायदे करके कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार लोगों का मजाक उड़ाती रहेगी। अब इसका फैसला होने वाला है। पूरा देश सरकार की नीतियों से हताश हो चुका है। महंगाई ने चारों तरफ हाहाकार मचा दी है। कांग्रेस ये समझ ले कि अब देश की जनता बदला लेने के मूड में है और जब भी उन्हें चुनावों में अवसर मिलेगा, इस का प्रतिशोध जनता जरूर लेगी। डा. गणेश दद्वत्त्ड्ढ
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