काली माटी, भूरी माटी,
मटमैली, मनभाती माटी
देशवासियों की ये थाती
मेरे देश की अनुपम माटी।
बलिहारी, धन धरती माटी।।
ये माटी धान उगावे रे।
ये माटी मान जगावे रे।
ये माटी शान बढ़ावे रे।
बैरी का खून बहावे रे।
मर-मिट जावें ऐसी माटी।
बलिहारी, धन धरती माटी।।
इस माटी में उपजे हीरे।
इस माटी में निपजे मोती।
माटी में हम खेलें खेल।
ठेलम ठेल और रेलम पेल।
हरी-भरी लहराती माटी।
बलिहारी, धन धरती माटी।। द श्याम अश्याम
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