ज्योति-बुद्धदेव न्यायालय में हाजिर होंगे?
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ माकपा नेता ज्योति बसु, उनके पुत्र चन्दन बसु और वर्तमान मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को सर्वोच्च न्यायालय में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। इनके अलावा प. बंगाल के शहरी विकास मंत्री अशोक भट्टाचार्य, वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता, पूर्व मंत्री प्रशान्त शूर और दिलीप गुप्त को भी ये आदेश दिए गए हैं। 28 अप्रैल, 2006 को न्यायमूर्ति रूमा पाल की पीठ ने आदेश जारी करते हुए उपरोक्त लोगों से कहा है कि वे "नोटिस" मिलने के तीन सप्ताह के अन्दर स्वयं या अपने वकील के माध्यम से अपना पक्ष न्यायालय में रखें। उल्लेखनीय है कि कोलकाता के साल्ट लेक के महंगे भूखण्डों के आवंटन को लेकर 14 जनवरी, 2005 को सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता एवं "आल इंडिया लीगल एड फोरम" के महामंत्री जयदीप मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के कार्यकाल में साल्ट लेक के महंगे भूखण्डों का आवंटन गैरकानूनी तरीके से कुछ न्यायाधीशों, अधिकारियों एवं उद्योगपतियों को किया गया था। और यह सिलसिला वर्तमान मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के समय में भी जारी है। 17 जनवरी, 2006 को न्यायालय द्वारा आवंटितों की सूची मांगे जाने पर उन्होंने 265 लोगों की सूची भी अदालत को सौंप दी थी। इसके बाद न्यायालय ने यह आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश भगवती प्रसाद वंद्योपाध्याय को भी साल्ट लेक में आवासीय भूखण्ड आवंटित किया था। इसके बाद न्यायाधीश वंद्योपाध्याय ने उस भूखण्ड पर एक आलीशान मकान बनवाया। उनका यह मामला न्यायालय तक पहुंचा और उन्हें वह मकान छोड़ना पड़ा। बाद में न्यायालय ने उस मकान को नीलाम कर दिया। इससे सिद्ध होता है कि भू-आवंटन में अनियमितताएं बरती गई हैं। उधर साल्ट लेक स्थित चन्दन बसु के भव्य मकान को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। ध्यान देने योग्य बात है कि ज्योति बसु ने अपेन साले, जिनका कोई वारिस नहीं था, को भी साल्ट लेक में एक भूखण्ड आवंटित किया था। बाद में उन्होंने अपने भांजे यानी चंदन बसु को गोद ले लिया और वह भूखण्ड चन्दन बसु के पास आ गया। मामा की मृत्यु की बाद उसी भूखण्ड पर चन्दन बसु ने शानदार मकान बनवाया है। सूत्रों का कहना है कि यह सब सोची-समझी रणीनति के तहत किया गया ताकि ज्योति बसु पर यह आरोप न लगे कि उन्होंने अपने बेटे को भूखण्ड आवंटित किया। इन दिनों ज्योति बसु भी साल्ट लेक स्थित "इन्दिरा आवास" में रह रहे हैं जबकि बालीगंज में उनका अपना तिमंजिला मकान खाली पड़ा है। कहा जा रहा है कि "इन्दिरा आवास" का किराया प्रतिमाह 5 हजार रुपए है और इसका भुगतान माकपा के खाते से किया जाएगा।
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