मंगलम, शुभ मंगलम


इस स्तम्भ में दम्पत्ति अपने विवाह की वर्षगांठ पर 50 शब्दों में परस्पर बधाई संदेश दे सकते हैं। इसके साथ 200 शब्दों में विवाह से सम्बंधित कोई गुदगुदाने वाला प्रसंग भी लिखकर भेज सकते हैं। प्रकाशनार्थ स्वीकृत प्रसंग पर 200 रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।

पाऊं तुम्हें हर जनम!!

अपनी धर्मपत्नी श्रीमती वैभवी व दोनों पुत्रों (दीपक व सचिन) के साथ श्री विभाकर नाईक

प्रिय वैभवी,

हमारे विवाह को 34 वर्ष हो गए। तीन दशक से अधिक का यह समय अधिकांशत: मुश्किलों में ही बीता। परंतु तुमने लगातार इन सब मुश्किलों का सामना करते हुए न केवल मुझे बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारियों को भी संभाले रखा।

मुझे आज भी याद है सन् 1982 की वह घटना, जिसमें मेरी नौकरी जाती रही थी। तब मैं लगभग टूट-सा गया था। आर्थिक संकट और अपनों के तानों ने मेरी जिंदगी को बेरुखा बना दिया था। तब तुमने मुझे हिम्मत देते हुए कहा था कि सुख-दु:ख तो जिंदगी के दो पहलू हैं। यदि आज हम दु:ख देख रहे हैं तो कल सुख भी देखेंगे।

तुम्हारी अथाह लगन व स्नेह शक्ति ने मुझे नैतिक बल प्रदान किया; जिससे न केवल मुझे अपनी खोई हुई नौकरी मिली, अपितु पुन: सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त हो गई। सेवानिवृत्ति के इस दौर में आज मैं स्वयं को अत्यधिक गर्वित अनुभव कर रहा हूं कि मुझे तुम्हारे रूप में एक धैर्यवान व संघर्षशील जीवन-संगिनी मिली। तुम्हें ही हर जनम में पाऊं‚ यही ईश्वर से प्रार्थना है।

तुम्हारा

विभाकर नाईक

185, सिद्दीपुरम कालोनी, इन्दौर (म.प्र.)

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