मुइवा की मांग


नागालिम पर जनमत संग्रह हो!

एन.एस.सी.एन.नेताओं मुइवा और च्सी स्वू के साथ

(मध्य में) केन्द्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल

खबर है कि एन.एस.सी.एन. (आई.एम.) के महासचिव टी.मुइवा ने नागालैण्ड सहित पड़ोसी राज्यों मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के नागाबहुल क्षेत्रों को जोड़कर वृहत नागालैण्ड (नागालिम) बनाने की अपनी मांग पर जनमत संग्रह कराने की बात की है। पिछले सप्ताह दिल्ली में वार्ताओं का लम्बा सिलसिला खत्म करने के बाद अपने हीब्राोन स्थित मुख्यालय पहुंचने पर मुइवा ने कई नागा संगठनों से इस मुद्दे पर लंबी बातचीत की है।

मुइवा ने कहा है कि एन.एस. सी.एन. द्वारा ऐतिहासिक सबूत दिए जाने के बावजूद केन्द्र इस मुद्दे को सुलझाने में लंबा समय ले रहा है। उन्होंने कहा, "उत्तर-पूर्व के अलग-अलग स्थानों पर बसे नागाओं को एक स्थान पर मिलकर रहने का जन्मसिद्ध अधिकार है।" उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र नागालैण्ड से भेदभाव करते हुए असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश का बचाव करता दिख रहा है। ये वही राज्य हैं जो वृहत नागालैण्ड की मांग के विरोधी हैं।

कोहिमा से विशेष संवाददाता

एन.एस.आई.एम. के सूत्रों के अनुसार हीब्रोन मुख्यालय में उपस्थित विभिन्न नागा संगठनों ने कहा है कि केन्द्र नागाओं के धैर्य की परीक्षा ले रहा है और समस्या को सुलझाने में जरूरत से ज्यादा समय लगा रहा है। इन संगठनों ने कथित धमकी के तौर पर कहा कि जब तक नागालिम की उनकी मांग नहीं मानी जाती तब तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, भले इसमें 50 वर्ष लग जाएं।

इधर, केन्द्र के लिए नागालिम की मांग का समर्थन करने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश ने इस मुद्दे पर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया है। वहां के निवासी भी भौगोलिक एकजुटता को लेकर संकल्पबद्ध हैं। इन राज्यों में जबरदस्त आक्रोश भी दिखा था। असम और अरुणाचल की कांग्रेस सरकारों ने राज्य की सीमाओं से छेड़छाड़ के किसी भी इरादे का विरोध करने की बात की है। एक केन्द्रीय गुप्तचर अधिकारी के अनुसार, "केन्द्र इस मांग का समर्थन नहीं कर सकता, इसीलिए कोई बीच का रास्ता खोजने की कोशिश चल रही है।"

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