गोवा हो या झारखण्ड-फैसले सोनिया गांधी के


-प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा

लोकसभा में भाजपा के उपनेता

झारखण्ड के राज्यपाल ने जिस तरह लोकतंत्र का दमन किया उस पर अब श्रीमती सोनिया गांधी का यह कहना कि यह सब उनकी जानकारी में नहीं था, एकदम निराधार है। आज कांग्रेस की राजनीति में जितने भी फैसले हो रहे हैं वे सब सोनिया गांधी ही कर रही हैं। देश में जहां-जहां जनतंत्र की हत्या हो रही है, गैर कानूनी, अनैतिक, असंवैधानिक काम हो रहे हैं, ये सब कांग्रेस आलाकमान के ही निर्देश से हो रहे हैं। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह तो महज एक कठपुतली की तरह हैं और बाकी नेताओं की तो कांग्रेस में कोई कीमत ही नहीं है।

गोवा में जो भी हुआ, झारखण्ड में हुआ या फिर बिहार में जिस तरह लालू यादव को समर्थन की चिट्ठी दे दी, ये सब सोनिया गांधी के ही फैसले थे। हुआ यूं कि शुरू में उनकी यही दिखाने की रणनीति थी कि वे श्रीमती इंदिरा गांधी से ज्यादा कठोर हैं, मजबूत हैं। वे चाहती थीं कि जो वे कहें, वैसा ही हो। लेकिन जब झारखण्ड का मामला उलटा पड़ा और सारे देश में थू-थू होने लगी, छिछालेदर हुई तो इन्हें अपनी छवि की चिंता हुई। श्रीमती सोनिया गांधी ने तब अपने कदम खींचने शुरू कर दिए, कहने लगीं, मुझे तो कुछ पता ही नहीं था, यह मेरे कहने से नहीं हुआ। अंबिका सोनी को आगे कर दिया सफाई देने के लिए। ये सब फासीवादी तौर-तरीके हैं। और फासीवाद को श्रीमती सोनिया गांधी से बेहतर कौन जानता है, क्योंकि जिस इटली में फासीवाद जन्मा, सोनिया भी उसी इटली में जन्मीं हैं। वे उसी फासीवाद को हिन्दुस्थान में ला रही हैं। इससे देश को सावधान रहना चाहिए।

श्रीमती सोनिया गांधी संघर्ष की राजनीति को फिर से चलाना चाहती हैं। श्रीमती इंदिरा गांधी के समय तो फिर भी कुछ कद वाले नेता थे, लेकिन सोनिया गांधी के समय में तो ऐसा एक भी नेता नहीं बचा है। पूरी पार्टी पर इनका कब्जा है, कोई चूं तक नहीं कर सकता। मुझे तो लगता है कि ये धीरे-धीरे 1975 के आपातकाल की तरफ बढ़ रहे हैं। गोवा में हुआ, झारखण्ड में और अब बिहार में वही करने की संभावना दिखती है। झारखण्ड में तो बताते हैं राज्यपाल को कह दिया गया था कि स्टीफन मराण्डी को बता दें कि अगर उनके साथ 5 विधायक भी हुए तो भी सरकार उनकी ही बनेगी। ये सब फासिस्ट तरीके हैं, जो हिन्दुस्थान में लाए जा रहे हैं। यह एक बड़ा खतरा है और इसीलिए भाजपा से विरोधी विचारधारा के होते हुए भी पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, देवेगौड़ा, गुजराल व पूर्व राष्ट्रपति वेंकटरमण सहित माकपा ने भी झारखण्ड प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। देश को इस फासिज्म से सावधान रहना चाहिए।

NEWS