झारखण्ड तो आने वाले समय का नमूना मात्र है


"भले" लोग

-रपट एवं साक्षात्कार आलोक गोस्वामी

27फरवरी से 3 मार्च तक रांची और नई दिल्ली में जो भी घटा, अभूतपूर्व ही कहा जा सकता है। 26 को 36 से बड़ा मानने वाले झारखण्ड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने 10, जनपथ की तय योजना पर वफादार कांग्रेसी की तरह रांची के राजभवन में गांधी जी की तस्वीर के ठीक नीचे लोकतंत्र का दमन किया। "भले" लोग हैं ये इसलिए सब "भला" ही "भला" देखते हैं, करते हैं, बखानते हैं। जितने जोश से भरे झामुमो-कांग्रेस समर्थक राजभवन के अंदर थे, उससे कहीं ज्यादा बाहर दरवाजे पर "जोश" दिखा रहे थे। अधिक सीटें जीतने के बाद भी भाजपा-जद(यू) और 5 निर्दलीय विधायकों के समर्थक अंतिम समय में लोकतंत्र के पहरूओं में किसी सद्बुद्धि के इंतजार में खड़े थे, उन्हें भी "सत्ता" पर बैठने वालों ने डराना-धमकाना शुरू कर दिया। "भले" लोगों ने ऐसा खौफ बरपाया कि विजयी गठबंधन को केवल राष्ट्रपति भवन से ही न्याय की आस बची। लेकिन दिल्ली तक पहुंचना आसान नहीं था। "भले" शिबू सोरेन और स्टीफन मराण्डी के लोग 5 निर्दलीय विधायकों की खोज में हाकी लहराते हुए रांची हवाई अड्डे में भीतर तक जा पहुंचे।

शिबू सोरेन

राजभवन में तीन "भले" लोग और थे जो दिल्ली के इशारे पर काम को अंजाम देने गए थे- प्रियरंजन दास मुंशी (जो 2 फरवरी को गोवा में "महारथ" दिखा चुके थे), अजीत जोगी (जो छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बचाने के लिए खरीद-फरोख्त करने के अनुभवी थे) और सुबोधकांत सहाय। बिहार से लालू यादव की चिट्ठी का इंतजाम हो चुका था। "भले" लालू यादव ने अपने लिए चिट्ठी मंगाकर ही रांची को चिट्ठी भेजी थी।

और फिर शुरू हुआ भाजपा-जद(यू) और 5 निर्दलीय विधायकों का दिल्ली की ओर कूच। कैसे बीता वह सफर, उसका ब्यौरा अलग से दिया जा रहा है। बहरहाल, जैसा प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा, निश्चित तौर पर वह फासीवाद ही था क्योंकि "भले" लोग और कुछ नहीं कर सकते थे। गोवा हुआ, झारखण्ड हुआ, बिहार में वैसा ही कुछ होने की संभावनाएं हैं और फिर शायद उत्तर प्रदेश में वही सब दोहराया जाएगा। विशेषज्ञों ने तो इस बात की पूरी तैयारी बताई है।

राष्ट्रपति भवन पहुंचे राजग गठबंधन के 36 और 5 निर्दलीय विधायकों के चेहरों पर संतोष की झलक दिख रही थी। मानो भाजपा अध्यक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी और राजग संयोजक श्री जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलकर झारखण्ड में जो कुछ हुआ, वह सब कहने के बाद किसी तरह के न्याय की आस बंधी थी। राष्ट्रपति ने भी अपनी शक्ति का सदुपयोग करके राज्यपाल सिब्ते रजी को दिल्ली तलब किया। दिल्ली से वापस रवाना होने से पूर्व राज्यपाल रजी ने कहा कि वे सभी पक्षों से बात करेंगे। कयास ये लगाये जा रहे हैं कि वे विश्वासमत प्राप्त करने की तारीख 21 मार्च से पहले सरका सकते हैं। झारखण्ड प्रकरण पर पाञ्चजन्य ने इसके विभिन्न पक्षों सहित प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मराण्डी, राज्यसभा सदस्य अजय मारू और लोकसभा में भाजपा के उपनेता प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा से खास बातचीत की। यहां प्रस्तुत है झारखण्ड प्रकरण पर यह विशेष आयोजन।

लोकतंत्र का मजाक बनाया राज्यपाल ने

-बाबूलाल मरांडी

पूर्व मुख्यमंत्री, झारखण्ड एवं

लोकसभा सांसद (भाजपा)

रांची में राज्यपाल ने शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया। आपकी क्या टिप्पणी है?

यह तो सरासर गुंडागर्दी है। जिस प्रकार से राज्यपाल सिब्ते रजी ने लोकतंत्र का मखौल उड़ाया है, इसका संसदीय लोकतंत्र में कोई उदाहरण नहीं मिलेगा। भाजपा- जद(यू) का चुनाव पूर्व गठबंधन था, उसे 36 सीटें प्राप्त हुईं। झामुमो-कांग्रेस गठबंधन को 26 सीटें प्राप्त हुई थीं। बाद में राजद के समर्थन से उनकी 33 सीटें हो गईं और हमें 5 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दिया तो हमारी संख्या 41 हो गई। हम राज्यपाल के सामने 41 विधायकों की सूची ही लेकर नहीं गए बल्कि 5 विधायकों को भी साथ लेकर गए थे।

लेकिन राज्यपाल ने तो उन निर्दलीय विधायकों को अलग से बुलाया था?

जब हम उन्हें अपने साथ राजभवन ले गए थे तो राज्यपाल ने कहा, नहीं, हम अलग से उनसे मिलकर संतुष्ट हो लेंगे। अगले दिन उन्होंने पांचों निर्दलीय विधायकों से अलग से बात की। इसके बाद भी मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए शिबू सोरेन को आमंत्रित करना समझ से परे है।

झामुमो नेताओं ने आप पर निर्दलीय विधायकों का अपहरण करने का आरोप लगाया?

हम पांचों निर्दलीय विधायकों को साथ लेकर राजभवन गए थे। इस पर भी कोई कहे कि इनका अपहरण किया है तो इससे बढ़कर निराधार बात और क्या हो सकती है। पहले दिन हम साथ-साथ राजभवन गए थे। राज्यपाल की इच्छा पर अगले दिन वे पांच निर्दलीय अकेले उनसे मिलने गए थे। यानी वे हमेशा हमारे साथ रहे हैं, प्रेस के सामने भी उन्होंने हमें समर्थन देने की बात बार-बार कही है, ऐसे में अपहरण जैसी बातें करना एक बड़ा मजाक है।

रांची से दिल्ली आने वाले आपके हवाई जहाज को रोका गया, क्यों?

जब हमारे सब विधायक राष्ट्रपति जी से मिलने दिल्ली आने के लिए 2 मार्च की शाम हवाई जहाज में बैठ चुके थे तब राज्य के दो मंत्री हवाई अड्डे पर पहुंचे और हवाई जहाज की तलाशी लेने पर आमादा हो गए। हमें इस बात का संदेह था इसलिए हमने इन निर्दलीय विधायकों से पहले ही कह दिया था कि आप हवाई जहाज से न जाएं, किसी दूसरे स्थान से दिल्ली पहुंचें।

किसी दूसरे स्थान से यानी...?

2 मार्च को ये निर्दलीय विधायक शाम 3 बजे के करीब रांची से सड़क मार्ग से दुर्गापुर (प. बंगाल) होते हुए खड़गपुर पहुंचे। वहां से रात 2 बजे रेल से भुवनेश्वर पहुंचे। वहां से आज (3 मार्च) दोपहर बाद हवाई जहाज से दिल्ली पहुंच गए।

ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी?

शिबू सोरेन पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता था। अगर आप उनके अतीत को देखें तो पाएंगे कि उनके ऊपर कितने आपराधिक मामले चल रहे हैं। शशिनाथ झा हत्याकांड में सी.बी.आई. की जांच हुई, कई दिन तक सोरेन जेल में रहे। हुड़को नरसंहार के मामले में गिरीडीह में आरोप दायर हो चुका है, चिरूडीह नरसंहार का आरोप भी जामताड़ा अदालत में दायर है। जिसके ऊपर हत्या के इतने आरोप लगे हों तो उसके राज में कोई भी विधायक खासकर निर्दलीय, खुद को सुरक्षित कैसे महसूस कर सकते हैं। इसीलिए हमने खतरे का अंदेशा होने पर ऐसी व्यवस्था की थी।

राष्ट्रपति जी ने राज्यपाल को दिल्ली बुलाया, इससे क्या संकेत मिलता है?

राष्ट्रपति जी अपनी शक्ति का उपयोग करके संविधान की रक्षा कर सकते हैं।

NEWS