अंक सन्दर्भ 13 फरवरी, 2005
पञ्चांग
संवत् 2061 वि. वार ई. सन् 2005
फाल्गुन शुक्ल 3 रवि 13 मार्च
,, ,, 4 सोम 14 मार्च
,, ,, 5 मंगल 15 मार्च
,, ,, 6 बुध 16 मार्च
,, ,, 7 गुरु 17 मार्च
,, ,, 8 शुक्र 18 मार्च
,, ,, 9 शनि 19 मार्च
गोवा बर्खास्तगी
एक कांग्रेसी तमाशा
गोवा में जिस तरह कायदे-कानून को ताक पर रखकर भाजपा सरकार को बर्खास्त किया गया, वह न केवल निन्दनीय है, बल्कि इस घटना ने लोकतंत्र की गरिमा को भी कलंकित किया है। मात्र अपने राजनीतिक हित के लिए सरकार गिराने की योजना बनाने वाली कांग्रेस पार्टी ने इस घटना से अपनी तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया है। इस प्रकार की तानाशाही करके कांग्रेस आखिर क्या सिद्ध करना चाहती है? राज्यपाल जमीर के पास तो लगता है कि "जमीर" बचा ही नहीं है। उन्होंने राज्यपाल पद की गरिमा को लजाया है।
-विभव सक्सेना
4-बी, बल्लभनगर, पीलीभीत (उ.प्र.)
पुरस्कृत पत्र
यहां आते हैं सरस्वती के उपासक
पुणे महाराष्ट्र का एक ऐतिहासिक नगर है। यहां के जिमखाना परिसर में "इन्टरनेशनल बुक सर्विस" नाम से एक "ग्रंथ सेवा केन्द्र" है। पिछले दिनों इस केन्द्र के 75 वर्ष पूरे हुए हैं। केद्र की विशेषता है कि यहां अंग्रेजी की पुस्तकों का अद्यतन भंडार है। कहा जाता है कि देशभर की किसी भी दुकान में अंग्रेजी भाषा में लिखित जो पुस्तक नहीं मिलेगी, वह यहां मिल सकती है। इस केन्द्र के स्वामी थे स्व. विट्ठलराव दीक्षित। उनकी मृत्यु के बाद उनके सुपुत्र श्री उपेन्द्र दीक्षित इस केन्द्र को संभाल रहे हैं। स्व. विट्ठलराव पुस्तकों के विक्रेता नहीं थे, बल्कि पुस्तक-प्रेमी थे। पुस्तकों के प्रति उनके इसी प्रेम ने उन्हेंं पुस्तकों और ग्रंथों के संकलन की प्रेरणा दी। कुछ ही समय में उन्होंने इस केन्द्र में दुर्लभ ग्रंथों का भण्डारण कर लिया था, यह सिलसिला आज भी चल रहा है। इसलिए जब कभी कोई पुस्तक प्रेमी पुणे आता है तो इस केन्द्र में अवश्य पधारता है। इस केन्द्र में आने वाले पुस्तक प्रेमियों में पूर्व राष्ट्रपति डा. एस. राधाकृष्णन, पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इन्दिरा गांधी, रंगकर्मी इब्राहिम अल्काजी, विलियम गोलिंग, अरुंधति राय, आर.के. लक्ष्मण जैसे सैकड़ों लेखक एवं जनसाधारण शामिल हैं। श्री उपेन्द्र कहते हैं कि सरस्वती के उपासकों का सान्निध्य हमें मिलता है, यही हमारे लिए सबसे बड़ी सम्पत्ति है।
-मल्हार कृष्ण गोखले
पारेख बिÏल्डग,
30 लेबर नयम रोड,
गांव देवी, मुम्बई (महाराष्ट्र)
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हर सप्ताह एक चुटीले, हृदयग्राही पत्र पर 100 रु. का पुरस्कार दिया जाएगा।सं.
गोवा के राज्यपाल एस.सी. जमीर ने मनोहर पर्रीकर सरकार को बर्खास्त कर न केवल असंवैधानिक कार्य किया, बल्कि कांग्रेस की चमचागिरी ही की है। जमीर का यह कौन-सा नियम है कि बहुमत सिद्ध करने के लिए वे मनोहर पर्रीकर को 30 घंटे का भी समय नहीं देना चाहते थे, जबकि दूसरी ओर प्रताप सिंह राणे को उन्होंने 30 दिन का समय दे दिया?
-तेजपाल वाष्र्णेय
मलियाना चौक, अलीगढ़ (उ.प्र.)
सम्पादकीय "गोवा का सन्देश" में सही लिखा गया है कि वास्तव में यह समय भारतीय उप-महाद्वीप के हिन्दुओं के लिए कठिन चुनौती बन कर उभरा है। गोवा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बहुमत में होते हुए भी गिराकर राज्यपाल जमीर ने पद की गरिमा धूमिल की है। विधानसभा भवन से विधायक निकले भी नहीं थे कि पर्रीकर को उनकी बर्खास्तगी का पत्र सौंप दिया गया। मनमोहन सिंह सरकार के इशारे पर पर्रीकर को बहुमत सिद्ध करने के लिए एक दिन का समय दिया गया तो रात के अंधेरे में बनाए गए कांग्रेसी मुख्यमंत्री राणे को एक माह का समय दिया गया। क्या यह संवैधानिक नियम है? हिन्दू राष्ट्र नेपाल को भी हिंसक माओवाद का मुकाबला करना पड़ रहा है। लगता है भारत के सेकुलरों व छद्म लोकतंत्रवादियों की नजर में इन मौतों की कोई कीमत नहीं, क्योंकि वे हिन्दू हैं।
-रामचन्द बाबानी
70, स्टेशन मार्ग, नसीराबाद (राजस्थान)
गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर अपने विधायकों को संभाल नहीं सके तभी तो तीन विधायकों ने इस्तीफा दिया और यह संकट पैदा हुआ। विधायकों द्वारा इस्तीफा देने का कारण जो भी रहा हो, पर यह देखा जाता है कि भाजपा का प्रदेश नेतृत्व अपने सहयोगियों की ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की भी उपेक्षा करता है।
-बी.एल. सचदेवा
263, आई.एन.ए. मार्केट, नई दिल्ली
यह शोर क्यों?
नेपाल में माओवादियों के प्रहार और राजनीतिक दलों की अकर्मण्यता से त्रस्त होकर महाराजा ज्ञानेन्द्र ने आपातकाल लगाया तो विश्वभर में लोकतंत्र की हत्या के नाम पर शोर-शराबा किया गया। यहां तक कि वर्षों से लोकतंत्र का गला घोंटे बैठे पाकिस्तानी शासक मुशर्रफ से सद्भाव (जो उनके शब्दकोष में ही नहीं है) बढ़ाने को आतुर भारत सरकार ने भी कड़ा विरोध करते हुए नेपाल को दी जा रही सैन्य सहायता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। माओवादियों की हिंसक करतूतों से नेपाल झुलस रहा है। पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था आई.एस.आई. वहां भारत-विरोधी गतिविधियां चला रही है। नेपाल में बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे हालात को रोकने के लिए यदि राजशाही अपने अधिकारों का प्रयोग करती है तो इसमें इतनी हायतौबा क्यों? हम म्यांमार में सैनिक शासन पर चुप हैं। पाकिस्तान में तो विरोध के बजाय उल्टा प्रेम बढ़ाने को आतुर हैं। जब भूटान की शाही सेना उल्फा से जुड़े आतंकवादियों का सफाया करती है तो हम उसका आभार व्यक्त करते हैं। पर जब नेपाल ऐसा कार्य करने की शुरुआत करता है तो शोर क्यों मचाया जा रहा है? यदि कोई नेपाल के आपातकाल को 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के नजरिये से ही देखकर विरोध करता है तो वह गलत है। वास्तव में भारत में 1975 का आपातकाल सत्ता को बचाने के लिए था, जबकि नेपाल में यह एक राष्ट्र को बचाने की कोशिश में लगाया गया है।
-संजय चतुर्वेदी
पत्थर गली, आबूरोड (राजस्थान)
नेपाल के वर्तमान घटनाचक्र से चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है। माओवादी कितना भी जोर लगाएं और भ्रष्ट राजनीतिज्ञ कुछ भी करें, हिन्दुत्व की भावना से ओतप्रोत नेपाली जनता दुनिया के इस एकमात्र हिन्दू राष्ट्र के ध्वज को झुकने नहीं देगी। इसलिए नेपाल को दी जा रही सहायता भारत बन्द न करके माओवादियों को कुचलने में राजा की सहायता करे।
-पद्माकर कोवले
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
नेपाल में माओवादियों के आतंक को देखकर राजा ने आपातकाल लागू किया है। वे नहीं चाहते कि नेपाल में और अधिक अशान्ति फैले। यह उनका दायित्व भी है। नेपाल में अशान्ति फैलने से भारत को भी नुकसान होगा। इसलिए संकट की इस घड़ी में भारत को नेपाल की हर तरह से मदद करनी चाहिए।
-जगन्नाथ सिंधी
14/2, ओल्ड चाइना बाजार स्ट्रीट, कोलकाता (प. बंगाल)
स्तुत्य कार्य
संस्कार स्तम्भ में डा. नताशा अरोड़ा का लेख "मां ज्ञानदायिनी का आशीष" और छत्रपति शिवाजी के जीवन-चरित्र की कथा को पूरे विश्व में फैलाने वाले श्री बाबासाहब पुरंदरे के बारे में अच्छी जानकारी मिली। वास्तव में श्री बाबासाहब पुरंदरे स्तुत्य कार्य कर रहे हैं।
-अनिल गोयल
500/12, कम्बल वाला बाग, नई मण्डी
मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)
कहां का लेखन?
पुस्तक समीक्षा स्तम्भ के अन्तर्गत निशा मित्तल ने "कैसा ताज, कहां का ताज" शीर्षक से "डा. मनमोहन सिंह- कांटों का ताज" पुस्तक की अच्छी समीक्षा प्रस्तुत की है। पुस्तक लेखक की इस मानसिकता पर खेद होता है कि उन्होंने सोनिया गांधी के प्रति अपनी भक्ति दिखाने की कोशिश में पुस्तक में लिखा कि "सोनिया गांधी निधि हैं, डा. मनमोहन सिंह उनके प्रतिनिधि हैं।" लेखन का यह निकृष्टतम नमूना है।
-दुर्गेश
कलेक्ट्रेट, चुरू (राजस्थान)
प्रेरक रपट
चौधुरी शिवव्रत महान्ति की रपट "167 गोंड परिवारों की घरवापसी" से प्रेरणा लेनी चाहिए और ऐसे कार्यक्रम हर जगह होने चाहिए। हिन्दू विरोधी तत्व हिन्दुओं को तोड़ने में लगे हैं। इस स्थिति में ऐसे कार्यक्रम अधिक से अधिक होंगे तो हिन्दू विरोधी शक्तियां निश्चित रूप से कमजोर होंगी।
-विनोद कुमार शर्मा
ग्रा. व डाक-भूरा, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)
बंगलादेश का तालिबानीकरण
"कृतघ्न बंगलादेश" रपट से स्पष्ट होता है कि बंगलादेश तालिबानीकरण की राह पर है। आज बंगलादेश में हिन्दू स्त्रियों की अस्मिता की कोई कीमत नहीं है और वहां की सरकार अपराधियों को सजा देने के बजाय उनका हौसला बढ़ा रही है। पड़ोसी देशों, विशेषकर बंगलादेश से आए घुसपैठियों को जहां हम हर तरह की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं उन देशों में हिन्दुओं के साथ होने वाले अत्याचारों पर उफ् तक नहीं होती है। उन देशों में रहने वाले हिन्दू आज भारत की ओर आशाभरी दृष्टि से देख रहे हैं। अत: हमारा कर्तव्य बनता है कि हम उनकी हर तरह से सहायता करें।
-शक्तिरमण कुमार प्रसाद
श्रीकृष्णनगर, पथ सं.- 17, पटना (बिहार)
समाचार-पत्र ध्यान दें
समाचार पत्रों के पहले पन्ने पर आए दिन जो खबरें होती हैं वे समाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। कहीं हत्या है तो कहीं बलात्कार। ऐसी खबरों को पढ़कर समाज में इसी तरह की दूषित मानसिकता के प्रसार से इंकार नहीं किया जा सकता। देश के संदर्भ में महत्वपूर्ण खबरें प्रकाशित होनी चाहिए पर साथ ही यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि समाज में कुछ सकारात्मक संदेश जाए।
हरिओम गणपति सहस्रबुद्धे
बाबा लालदास मार्ग, सहारनपुर (उ.प्र.)
वे सावरकर नहीं
डा. देवेन्द्र प्रसाद शर्मा के लेख "संघ पूरे कर रहा है: गांधी जी के अधूरे सपने" के साथ छपे रेखाचित्र का परिचय दिया गया है, " महात्मा गांधी और डा. हेडगेवार मंत्रणा करते हुए। साथ में हैं (सबसे दाएं) वीर सावरकर।" यह ठीक नहीं है। गांधी जी 25 दिसम्बर, 1934 को वर्धा शिविर में गए थे, तब डा. हेडगेवार वहां नहीं थे। 26 दिसम्बर, 1934 को डा. साहब जब गांधी जी से मिलने श्री जमनालाल बजाज के बंगले (सत्याग्रह आश्रम) पर गए तो उनके साथ श्री अप्पा जी जोशी तथा श्री अण्णासाहब भोपटकर थे। प्रकाशित रेखाचित्र उसी अवसर का था।
-विजय कुमार
सहायक सम्पादक, राष्ट्रधर्म, लखनऊ (उ.प्र.)
नहीं राजी अमरीका
क्योटो संधि हो गयी, लागू मेरे मित्र
लेकिन इससे विश्व का, क्या बदलेगा चित्र?
क्या बदलेगा चित्र, नहीं राजी अमरीका
सुधरे पर्यावरण, नहीं यह उसका ठेका।
कह "प्रशांत" वह खूब प्रदूषण फैलाएगा
कसकी हिम्मत है जो उससे टकराएगा?
-प्रशांत
सूक्ष्मिका
उनकी धज्जियां
जमीन पर नहीं आकाश पर भी
नजर आती हैं उनकी फुलझड़ियां
वहां कभी वे खुद उड़ते हैं
कभी उनकी धज्जियां
-मिश्रीलाल जायसवाल
सुभाष चौक, कटनी (म.प्र.)
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