अब दिल्ली की सेकुलर कांग्रेस सरकार के लिए


"ई" से ईख नहीं, "ईद"!

शिक्षा को सेकुलर बनाने की दिल्ली सरकार की मुहिम जारी है। दिल्ली सरकार के अधीन कार्यरत, दिल्ली राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् ने जो किताबें प्रकाशित की हैं, उनमें सेकुलरवादी झुकाव और त्रुटियों की चर्चा हमने पहले भी की है। इस बार कक्षा एक की हिन्दी की पाठ्यपुस्तक के बारे में बताते हैं।

राजधानी दिल्ली के शिक्षा पाठक्रम में प्रथम कक्षा की हिन्दी पुस्तक "उड़ान" में वर्णमाला ज्ञान संबंधी पाठ में अब तक "ई" से "ईख" पढ़ाया जाता था। लेकिन तुष्टीकरण की मानसिकता के चलते अब कांग्रेस की सेकुलर सरकार ने इसमें परिवर्तन किया है। "ई" व इसकी मात्रा से बनने वाले जो शब्द पुस्तक में दिए गए हैं, वे हैं- ईद, ईदगाह, ईद का चांद, ईदी, जमीला, सेंवईं। जबकि इस देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीपावली, दीया, सीता, गीता आदि शब्द भी पढ़ाए जा सकते थे।

इसी तरह इस "उड़ान" पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 70 पर प्रकाशित कविता में भी हिन्दुओं की भावनाओं पर जमकर कुठाराघात किया गया है। कविता में दीपोत्सव के केन्द्र बिन्दु "दीपक" का अपमान एवं तिरस्कार किया गया है। पंक्तियां हैं-

"पत्ता बोले-

खड़ खड़ खड़,

कहें पटाखे-

भड़ भड़ भड़,

छुर छुर छुर बोलें-

फुलझड़ियां

रॉकेट बोले-

तड़ तड़ तड़!

मगर दीया कुछ भी न बोले,

अरे! शर्म से गड़ गड़ गड़!"

दीए को शर्म से गड़ जाने को कहा गया है। यह पढ़कर बच्चे दीपावली के दिन दीए के प्रति कैसा भाव रखेंगे? कोमल मन को अभी से दूषित करने का यह दुष्चक्र चलाया जा रहा है।

प्रकाश चन्द्र

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