बेलगाम कांग्रेस का लोकतंत्र पर आघात
झारखण्ड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी द्वारा संवैधानिक मर्यादाओं को अपमानित करने और शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाए जाने के विरोध में श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राजग प्रतिनिधिमण्डल ने 2 मार्च की शाम राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम से भेंट की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लोकतंत्र की रक्षा की अपील करते हुए राज्यपाल सिब्ते रजी के व्यवहार पर आपत्ति दर्ज कराई गई। यहां प्रस्तुत हैं उसी ज्ञापन के प्रमुख अंश-
झारखण्ड के राज्यपाल सिब्जे रजी द्वारा लोकतंत्र पर आघात किया गया है। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में संविधान के प्रावधान के तहत राज्यपाल को सबसे बड़े दल अथवा गठबंधन को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का न्यौता देना होता है। बोम्मई मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला तथा सरकारिया आयोग के दिशानिर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि बहुमत सिद्ध करने का उचित स्थान विधानसभा का सदन होता है न कि राजभवन।
चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि भाजपा-जद (यू) गठबंधन, झामुमो-कांग्रेस गठबंधन से 10 सीटें अधिक-जीतकर सबसे बड़ा गठबंधन है। अत: राज्यपाल को भाजपा-जद (यू) गठबंधन (राजग) के निर्वाचित नेता श्री अर्जुन मुण्डा को सरकार बनाने और सदन का विश्वास प्राप्त करने के लिए आमंत्रित करना था। लेकिन राज्यपाल ने संसदीय लोकतंत्र की सभी मर्यादाओं और परम्पराओं को रौंद डाला। खुद को कांग्रेस पार्टी का अनुचर सिद्ध करते हुए उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देशों पर अमल किया है।
कांग्रेसनीत सं.प्र.ग. सरकार राज्यपाल का राजनीतिक स्वार्थों के लिए दुरुपयोग कर रही है। अगर कांग्रेस को इस तरह के आघात करते रहने दिया गया तो भारत में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह पाएगा।
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