राज्यपाल ने "सुपारी हत्यारे" की भूमिका निभाई

भाजपा- जद(यू) और पांचों निर्दलीय विधायकों के साथ राष्ट्रपति से भेंट करने जाते हुए श्री जार्ज फर्नांडीस एवं श्री लालकृष्ण आडवाणी
3 मार्च की शाम को झारखण्ड के भाजपा-जद(यू) के 36 और 5 निर्दलीय विधायकों के साथ राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम से मिलने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री आडवाणी ने कहा, "झारखण्ड के राज्यपाल ने जिस तरह का व्यवहार किया और श्री शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाकर जो गलती की है उसका पूरा ब्यौरा देने और उचित कार्रवाई की मांग को लेकर हमने राष्ट्रपति जी से भेंट की। हमारी बात सुनने के बाद उन्होंने राज्यपाल श्री सिब्ते रजी को बुलावा भेजा है, यह बड़ी बात है। हमें लगता है कि बिहार में भी कुछ ऐसी ही परिस्थिति बनती जा रही थी, अब उसमें रुकावट आएगी। आगे से केन्द्र सरकार भी राज्यपाल का दुरुपयोग करने से पहले सोचेगी।
उन्होंने कहा, झारखण्ड में चुनाव के बाद आए जनादेश को इस सरकार ने राज्यपाल के जरिए अपहृत किया है। संविधान का उल्लंघन किया गया। इसके विरुद्ध हमारी लड़ाई को बल प्रदान करने के लिए झारखण्ड के ये विधायक यहां आए हैं। इन पांच निर्दलीय विधायकों को दिल्ली पहुंचने के लिए अनेक बाधाएं पार करनी पड़ीं। रांची से दिल्ली का रास्ता कोलकाता, भुवनेश्वर होता हुआ आया। यह बहुत शर्मनाक बात है। यह भारत के संवैधानिक इतिहास पर एक बड़ा धब्बा है।
श्री आडवाणी ने राज्यपाल रजी की इस कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह सुपारी हत्या की तरह है। इसमें नई दिल्ली की केन्द्र सरकार भी उतनी ही दोषी है। हमारी मांग है कि शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाए।"
इससे पूर्व 2 मार्च को लोकसभा में झारखण्ड मामले पर तीखी नौंक-झौंक हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार की। सदन में अनेक बार आए व्यवधान के बीच लोकसभा में प्रतिपक्ष नेता के रूप में बोलते हुए श्री आडवाणी ने कहा, "यू.पी.ए. सरकार ने राज्यपालों के माध्यम से गोवा एवं झारखण्ड में लोकतंत्र की हत्या की है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप राज्यपाल को नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े गठबंधन को आमंत्रित करना चाहिए था। झारखण्ड के राज्यपाल का फैसला अप्रत्याशित है एवं आपातकाल की घटनाओं से भी ज्यादा गंभीर है। गोवा में शुरुआत हुई थी और झारखण्ड में इसकी पुनरावृत्ति हुई है।
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