पाञ्चजन्य पचास वर्ष पहले


थ् वर्ष 8, अंक 23 थ् पौष शुक्ल 9, सं. 2011 वि., 3 जनवरी, 1955 थ् मूल्य 3आने

थ् सम्पादक : गिरीश चन्द्र मिश्र

थ् प्रकाशक - श्री राधेश्याम कपूर, राष्ट्रधर्म कार्यालय, सदर बाजार, लखनऊ

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सह-अस्तित्व की घोषणा हिन्दू ही कर सकता है

सरसंघचालक श्री गुरुजी की स्पष्टोक्ति

(निज प्रतिनिधि द्वारा)

नागपुर: यद्यपि हमारे प्रधानमंत्री पं. नेहरू को हिन्दुत्व से किंचित भी प्रेम नहीं है किन्तु उनके इस्लामी संस्कृति या अंग्रेजी या अंग्रेजी-शिक्षा के समस्त संस्कारों के बीच भी प्रसंगानुसार समय-समय पर हिन्दुत्व के संस्कारों का प्रभाव प्रकट होता है। सह अस्तित्व या सहजीवन के भाव उन्होंने ही सर्वप्रथम प्रकट किए हैं। इन भावों में भी शुद्ध हिन्दू जीवन का तत्वज्ञान प्रतिलक्षित होता दिखता है। विभिन्न जीवन-प्रणाली रखने वाले राष्ट्र एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहें, इस प्रकार के शब्द अमरीका, रूस अथवा इसी प्रकार के अन्य किसी राष्ट्र ने कहे नहीं। उनकी यह पात्रता ही नहीं है। मुसलमान और ईसाई तो पूर्णत: असहिष्णु हैं। सहजीवन विश्व में शांति स्थापना के निमित्त आवश्यक तथा आचरण के लिए सत्य है, ऐसी घोषणा करने का सौभाग्य सर्वप्रथम पं. नेहरू को प्राप्त हुआ है। हिन्दू ही ऐसी घोषणा कर सकते हैं। ये उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री गुरुजी ने नागपुर शाखा के शिशिर शिविर के समारोह के समय प्रस्तावित भाषण में कहे।

भ्रष्टाचार और अनाचार की भूमि- अमरीका

(निज प्रतिनिधि द्वारा)

लोग अमरीका को स्वर्ण भूमि समझते हैं तथा उसके वैभव से ईष्र्या करते हैं। किन्तु लेखक ने इस लेख में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि अमरीका स्वर्ण भूमि के साथ-साथ अनैतिकता एवं व्यभिचार का अड्डा भी बना हुआ है। -सम्पादक

अमरीका के बैकों में निरन्तर डकैतियों का जोर बढ़ता जा रहा है। सन् 1951 में 103, 1952 में 128, गत वर्ष 215 तथा इस वर्ष 271 बैंक-डकैतियों के काण्ड घटित हुए। गत कई वर्षों से बैंक डाकुओं की वक्र दृष्टि से बचे हुए थे। किन्तु गत माह युद्ध की समाप्ति होते ही डकैतियों की संख्या में आशा के विपरीत वृद्धि हुई है। सन् 1930 में नेल्सन और जॉन दिलिजर या जोर्डन का डकैतियां डालने वालों के सम्बंध में सर्वत्र अच्छी-खासी चर्चा रही। गत आठ वर्षों से इस प्रकार के प्रसंग अमरीका में पुन: काफी संख्या में उपस्थित होने लगे हैं।

सन्ध्या के समय बैंक कर्मचारियों के सीने पर पिस्तौल रख कर हजारों की रकम छीन लेना अमरीका में साधारण सी बात हो गई है।

इस प्रकार की घटनाओं से भयभीत होकर बैंक कर्मचारियों की रक्षा के लिए सभी प्रकार के सुरक्षात्मक तरीके अपनाए गए हैं। अधिकतर बैंकों में कर्मचारियों के बैठने के लिए कठघरे बनाए गए हैं। बैकों के खजांचियों की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ वस्त्रों की व्यवस्था की गई है और धन को रखने के लिए मजबूत से मजबूत तिजोरियां तैयार कराई गई हैं। किन्तु इन सब कार्यवाहियों के बावजूद भी डकैती की घटनाएं दिन-प्रतिदिन तीव्र गति से बढ़ती चली जा रही हैं। ऐसा आभास होता है, मानो इन सुरक्षात्मक कार्यों के कारण डकैती डालना और सरल हो गया हो।

सत्याग्रहियों पर बूटों का प्रहार

नव मंत्रिमंडल द्वारा शपथ लेते समय विशाल प्रदर्शन

जिस समय डा. सम्पूर्णानन्द जी का नवनिर्वाचित मंत्रिमण्डल शपथ ग्रहण करके लौट रहा था, उस समय गोहत्या निरोध समिति के सत्याग्रहियों ने विशाल प्रदर्शन कर मांग की कि गोहत्या बन्द की जाए। पुलिस ने सत्याग्रहियों पर बूटों के प्रहार किए तथा घोड़े भी दौड़ाए। इस अवसर पर 40 सत्याग्रही गिरफ्तार किए गए। उसी दिन बरेली विभाग के रा.स्व. संघ के विभाग संघचालक पं. राम स्नेही जी "एडवोकेट' सत्याग्रह करते हुए गिरफ्तार किए गए।

इस सप्ताह बलिया जनसंघ के प्रसिद्ध कार्यकर्ता श्री जगन्नाथ जी शुक्ल भी सत्याग्रह करते हुए गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब तक कुल 1608 सत्याग्रही बन्दी बनाए जा चुके हैं।

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