वाह क्या बात है!! उस दिन सबने रामभाऊ की इतनी तारीफ की बस वे छा गए आडवाणी ने कहा-


अपनी छवि सुधारनी है तो इनसे तरीके सीखें

दप्रतिनिधि

अपने रामभाऊ तो बस रामभाऊ ही हैं। संसद में भी उन्होंने ऐसे कार्य किए जो सांसदों के लिए उदाहरण बन गए हैं। वह फिर मंुबादेवी की नगरी "बाम्बे' को फिर से "मुम्बई' बनाने का मामला हो या फिर विश्व की पहली "महिला विशेष रेलगाड़ी' चलाने का। सबसे बढ़कर संसद में राष्ट्रगान "जन गण मन' एवं राष्ट्रगीत "वन्देमातरम्' के गायन को लेकर रामभाऊ का सदैव स्मरण किया जाता रहेगा। केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री राम नाईक, जिन्हें सभी स्नेह एवं सम्मान से रामभाऊ कहते हैं, की एक विशेषता यह भी है कि वे स्वयं को जन प्रतिनिधि के नाते जनता के प्रति जवाबदेह मानते हैं। इसीलिए प्रतिवर्ष किए गए कार्यों का वृत्त प्रकाशित कराकर उसे अपने निर्वाचन क्षेत्र में बंटवाते हैं। वे भारत के तीसरे बड़े निर्वाचन क्षेत्र उत्तर मुम्बई से लगातार 5 बार लोकसभा में चुनकर आने का कीर्तिमान स्थापित कर सके हैं। इससे पूर्व भी वे इसी लोकसभा क्षेत्र के बोरिवली विधानसभा क्षेत्र से लगातार 3 बार चुने गए। 1989 में पहली बार लोकसभा में जन प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे रामभाऊ ने जो जनहित कारी कार्य किए, उन्हें एक पुस्तक में संकलित कर प्रकाशित किया गया है। राम नाईक की उपलब्धियां

थ् संसद के सत्रारम्भ में राष्ट्रगान "जन-गण-मन' तथा सत्रावसान पर राष्ट्रगीत "वन्देमातरम्' का गायन प्रारम्भ करवाया।

थ् सांसद कोष की संकल्पना प्रस्तुत की।

थ् "बाम्बे', "बम्बई' को मुम्बई बनाया।

थ् उनके प्रयास से मुम्बई के अन्तरराष्ट्रीय सहार हवाई अड्डे का नाम "छत्रपति शिवाजी विमानपत्तन केन्द्र' हुआ।

थ् शिशु आहारों पर "मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम है' लिखने की अनिवार्यता लागू।

थ् वि·श्व की पहली "महिला विशेष रेलगाड़ी' मुम्बई में।

थ् नौसेना के युद्धपोत "विक्रांत' को राष्ट्रीय स्मारक बनवाने में अहम भूमिका।

थ् लोकसभा के केन्द्रीय कक्ष में वीर सावरकर की प्रतिमा स्थापित कराने में प्रमुख भूमिका।

थ् देश की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों को सम्मान, कारगिल युद्ध में शहीद सैनिकों के परिवार को पेट्रोल पम्प।

"लोकसभा में राम नाईक' नामक इस पुस्तक का गत 2 सितम्बर को लोकसभा के अध्यक्ष श्री मनोहर जोशी ने लोकार्पण किया। संसदीय ज्ञानपीठ (ग्रंथालय) के भव्य बालयोगी सभागार में भारतीय जनता पार्टी संसदीय दल द्वारा आयोजित इस लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी। संसदीय कार्य तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज विशिष्ट अतिथि थीं और भाजपा संसदीय दल की ओर से केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्रीमती भावनाबेन चिखलिया धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए उपस्थित थीं। मंच का संचालन कर रहे थे वर्षों तक राभभाऊ के साथ पेट्रोलियम राज्यमंत्री रहे एवं वतर्मान श्रम राज्यमंत्री श्री संतोष गंगवार। दर्शकों की अग्रिम पंक्ति में बैठे विशिष्ट अतिथि थे पूर्व प्रधानमंत्री श्री वि·श्वनाथ प्रताप सिंह एवं श्री चन्द्रशेखर, राज्यसभा की उपसभापति श्रीमती नजमा हेपतुल्ला, राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता डा. मनमोहन सिंह, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री पी.सी. अलेक्जेंडर की उपस्थिति रामभाऊ की लोकप्रियता दर्शाती थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री मदन दास, भारतीय मजदूर संघ तथा किसान संघ के संस्थापक श्री दत्तोपंत ठेंगडी, स्वदेशी जागरण मंच के श्री मुरलीधर राव सहित रा.स्व.संघ एवं अन्य समविचारी संगठनों के अनेक पदाधिकारी भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। अनेक केन्द्रीय मंत्री, राज्यमंत्री एवं सांसद तो थे ही।

पुस्तक के लोकार्पण के बाद उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सामान्य जनता के मन में जन प्रतिनिधि की छवि अच्छी नहीं है। हालांकि यह न्याय नहीं है। क्योंकि आम समाज में पतन से सभी प्रभावित होते हैं और जन प्रतिनिधि उससे अछूता नहीं रह सकता। किन्तु, चूंकि हम प्रचार के केन्द्र बिन्दु में होते हैं इसलिए आम समाज की दृष्टि हम पर लगी रहती है। ऐसे में रामभाऊ ने एक आदर्श प्रस्तुत किया है कि एक जन प्रतिनिधि आम जनता में कैसे लोकप्रिय एवं अच्छी छवि के साथ रह सकता है। हमें यदि अपनी छवि सुधारनी है तो रामभाऊ से कुछ सीखना होगा।

लोकसभा अध्यक्ष श्री मनोहर जोशी अपनी गंभीर छवि से एकदम उलट चुटीले और हास-परिहास के अंदाज में बोले कि रामभाऊ क्रिकेट के "आलराउंडर' के समान एक सांसद हैं। लोकसभा में रामभाऊ की "फीÏल्डग', "बाऊलिंग', "बैटिंग', और "विकेट कीपिंग' ने उन्हें मोहित कर दिया है। श्री मनोहर जोशी ने कहा कि उन्हें इस बात का अभिमान है कि श्री राम नाईक ने संसदीय मर्यादाओं का सदैव पालन किया। उल्लेखनीय है कि "लोकसभा में राम नाईक' पुस्तक की भूमिका श्री मनोहर जोशी ने ही लिखी है।

श्रीमती सुषमा स्वराज ने रामभाऊ के अनेक गुणों एवं कार्यों की चर्चा की। तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष श्री शिवराज पाटिल की लोकसभा में एक अध्यक्षीय टिप्पणी का उल्लेख करते हुए श्रीमती स्वराज ने बताया कि उन्होंने राम नाईक को अति वि·श्वनीय सांसद कहा था। उन्होंने समाचार पत्र में छपी रपट से श्री राम नाईक के कथन को अधिक वि·श्वसनीय माना था। यही एक सांसद की सबसे बड़ी पूंजी होती है।

25