एक महान क्रांतिकारी को


वीराञ्जलि

द मांडवी से किशोर मकवाणा

गत 4 सितम्बर को कच्छ जिले का छोटा-सा शहर मांडवी मानो क्रांतितीर्थ बन गया था। पूरा कच्छ उमड़ पड़ा था राष्ट्र सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित करने। क्रांतिवीर श्यामजी कृष्ण वर्मा के अस्थिकलश लेकर मुम्बई से शुरू हुई वीराञ्जलि यात्रा ने 1990 किलोमीटर की दूरी तय कर जब मांडवी में प्रवेश किया तो हजारों लोग इस महापुरुष के अस्थिकलश को श्रद्धाञ्जलि देने घंटों कतार में खड़े रहे। मांडवी में इस अस्थिकलश पर उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राजीव प्रताप रूडी, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुरेश मेहता सहित अनेक गण्यमान्य लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। मांडवी पहुंचते ही श्री आडवाणी श्यामजी कृष्ण वर्मा के पैतृक घर गए।

पं. श्यामजी कृष्ण वर्मा और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती भानुमति के अस्थिकलश

मांडवी शहर के इसी छोटे-से घर में गरीबी में पले श्यामजी छोटी उम्र में ही मुम्बई चले गए थे। वहां पढ़ाई की और विदेश पहुंचे। इसके बाद सिर्फ एक बार मातृभूमि में आए। इंग्लैण्ड में गोरों की नाक के नीचे उन्होंने भारत को विदेशी दासता से मुक्त कराने का महासंग्राम प्रारंभ किया और वे विदेशी धरती पर ही स्विट्जरलैण्ड के जेनेवा शहर में 30 मार्च, 1930 को परलोक सिधार गए। उन्होंने अपनी मृत्यु के समय दो इच्छाएं प्रकट की थीं, एक- "मेरी अस्थियां सुरक्षित रखी जाएं' और दो- "जब भारत स्वतंत्र हो जाए, तब मेरी अस्थियां भारत माता की गोद में समाहित कर दी जाएं।' उनकी पहली इच्छा तो स्विट्जरलैण्ड सरकार ने पूरी की। वहां

अस्थिकलश यात्रा में सबसे आगे सज्जित वाहन चल रहा था जिसमें अस्थिकलश रखे थे। वाहन पर लगा है श्यामजी कृष्ण वर्मा का चित्र

की सरकार ने श्यामजी कृष्ण वर्मा और उनकी धर्मपत्नी भानुमति (मृत्यु, 22 अगस्त, 1933) की अस्थियां सुरक्षित रखीं। लेकिन भारत को उनकी दूसरी इच्छा पूरी करने में 73 वर्ष लगे। भारत 1947 में स्वतंत्र तो हो गया, मगर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने जानबूझकर इन क्रांतिवीरों की अनदेखी की।

73 वर्ष बाद उनके अस्थिकलशों को श्री नरेन्द्र मोदी जेनेवा से लेकर आए। मांडवी के एक वृद्ध सज्जन, जिन्होंने श्यामजी कृष्ण वर्मा की स्मृतियों को संजोकर रखने में अपना पूरा जीवन लगा दिया, श्री हीरजी वीरजी काकाणी ने ठीक ही कहा, "आज हमारी तपस्या पूर्ण हुई। आज उनकी आत्मा को

नवसारी में यात्रा के स्वागत में नृत्य नाटिका प्रस्तुत करते हुए वनवासी बालक

कितनी शांति मिली होगी।' श्यामजी का अस्थिकलश उनके घर के आंगन में पहुंचा, तब सारे वातावरण में एक धीमा-मधुर निनाद गूंज रहा था, "मां... मेरी लाड़ली मां, देख तेरा शामू आज तेरी गोद में समाने आ गया। मां मैं 73 वर्ष से तड़प रहा था। तेरी गोद में आज मेरी आकांक्षा पूर्ण हुई...।' लोगों के चेहरे पर भी वही भाव तैर रहा था।

मांडवी की मणिबहन मांगे ने कहा, "आज कच्छ के लोगों के आनंद की सीमा नहीं। आज उनका पुत्र सूक्ष्म देह धारण कर अपनी मातृभूमि पर बड़े वीरोचित गौरव से वापस लौटा है। हमें गर्व है।' कच्छ जिले का प्रवेशद्वार यानी सूरजबारी पुल। यह पुल गुजरात के बाकी हिस्से से कच्छ को जोड़ता है। यहीं से वीराञ्जलि यात्रा ने 3 सितम्बर की सुबह 9:30 बजे कच्छ

यात्रा मार्ग में तिरंगा लिए अस्थिकलश दर्शन को खड़े बच्चे

में प्रवेश किया था। यात्रा ने जैसे ही कच्छ में प्रवेश किया, कच्छी मांडु (भाई) झूम उठे। इन लोगों ने परम्परागत नृत्य किया। अनेकों की आंखों में आंसू थे। सैकड़ों छोटे-छोटे बच्चे हाथ में तिरंगा लिए खड़े थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह राणा ने यात्रा का भावपूर्ण स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि श्री राणा श्यामजी कृष्ण वर्मा के साथी रहे क्रांतिवीर सरदारसिंह राणा के प्रपौत्र हैं। सूरजबारी से यात्रा भुज पहुंची। भुज में रात्रि विश्राम करने के बाद दूसरे दिन 4 सितम्बर की सुबह मांडवी के लिए रवाना हुई।

सुबह से ही मांडवी शहर सागर की तरह हिलोरें ले रहा था। लाखों लोग अस्थिकलश के दर्शन के लिए सुबह से ही मांडवी पहुंच गए थे। सुबह भुज विमानतल का नामकरण हुआ- क्रांतिवीर श्यामजी कृष्ण वर्मा विमानतल। दोपहर 2.30 बजे उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी, मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक नेता और मांडवी शहर के गण्यमान्यजन मांडवी के प्रख्यात जी.टी. मैदान पहुंचे। श्यामजी वर्मा के अस्थिकलश के साथ वीराञ्जलि यात्रा भी वहां पहुंची। यात्रा का स्वागत लाखों की संख्या में उपस्थित लोगों ने "भारत माता की जय' व "वंदेमातरम्' के नारों से किया। गुजरात में श्याम जी कृष्ण वर्मा की अस्थिकलश यात्रा का अभूतपूर्व स्वागत

क्रांतिवीर को नमन!

25 अगस्त को भारत के क्रांतिवीर सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी भानुमति के अस्थिकलश लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीराञ्जलि यात्रा के रूप में भीलाड़ा के पास नंदीग्राम से गुजरात में प्रवेश किया। गुजरात के राज्यपाल श्री कैलाशपति मिश्र वीराञ्जलि यात्रा का स्वागत करने स्वयं वहां उपस्थित थे। इस अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में श्री कैलाशपति मिश्र ने गुजरात के वीर सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा को देश की आजादी का सर्वोत्तम नेता कहकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

यात्रा के स्वागत हेतु रास्तों पर भी लोगों की भारी भीड़ जमा थी! छोटे-छोटे बच्चे हाथों में तिरंगा लिए तथा वृद्धजन हाथों में पुष्पमालाएं लिए अपने राष्ट्रवीर के अस्थिकलश के दर्शन हेतु घंटों प्रतीक्षा में खड़े थे। यात्रा का पूरा रास्ता कहीं फूलों से तो कहीं रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था।

वलसाड जिले के अनेक स्थानों से होते हुए वीराञ्जलि यात्रा ने जब नवसारी में प्रवेश किया तो वनवासी स्कूली बच्चों ने वनवासी नृत्य के साथ यात्रा का भव्य स्वागत किया। दांडी के प्रार्थना मंदिर में आयोजित प्रार्थना सभा के बाद नवसारी के अनेक स्थानों पर गुजरातवासियों के श्रद्धासुमन स्वीकार करती हुई वीराञ्जलि यात्रा सूरत जिले में प्रविष्ट हुई। यहां सूर्या गांव में बने गुरुकुल में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल की कर्मभूमि बारडोली के "स्वराज आश्रम' में भी यात्रा का अपूर्व स्वागत हुआ। सूरत जिले के अनेक गांवों से गुजरते हुए अस्थिकलश यात्रा ने रात साढ़े नौ बजे सूरत शहर में प्रवेश किया। सूरत नगरी प्रकाश से जगमगा रही थी। दर्शन के लिए लोग बड़ी आतुरता से प्रतीक्षा कर रहे थे। श्यामजी कृष्ण वर्मा के क्रांतिकारी सहयोगी सरदार सिंह राणा के प्रपौत्र और गुजरात भाजपा अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राणा भी वहां मौजूद थे।

सूरत से वीराञ्जलि यात्रा अंकले·श्वर, भरूच होते हुए बड़ौदा की ओर रवाना हुई। राजमार्ग से गुजरती वीराञ्जलि यात्रा का भरूच जिले के मुसलमान बंधुओं ने बड़े हर्षोंल्लास के साथ स्वागत किया। उन्होंने पुष्प अर्पित कर क्रांतिवीर को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

देर रात बड़ौदा पहुंची इस यात्रा का स्थानीय नेतागण एवं लोगों ने बड़े श्रद्धाभाव से स्वागत किया। बड़ौदा से हिम्मत नगर, महेसाणा होती हुई यात्रा अमदाबाद पहुंची। यहां यात्रा का अनूठा स्वागत हुआ। केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री जार्ज फर्नांडीस भी वहां उपस्थित थे। जनता को सम्बोधित करते हुए श्री फर्नांडीस ने श्यामजी कृष्ण वर्मा के अस्थिकलश स्वदेश लाने के कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने पर श्री मोदी का अभिनन्दन किया। उन्होंने कहा, "देश की आजादी के बाद यह अस्थिकलश भारत लाए जाने के लिए जो प्रयास होने चाहिए थे, वे नहीं हुए। उसके लिए कांग्रेस की दुर्भावनापूर्ण मानसिकता जिम्मेदार है।'

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "कांग्रेसियों को शर्म आनी चाहिए, जो आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों का ऋण चुकाना नहीं जानते और इस पवित्र अवसर का बहिष्कार करते हैं।' अमदाबाद से सौराष्ट्र की ओर प्रस्थान करती वीराञ्जलि यात्रा राजकोट, गांधी जी की जन्मस्थली पोरबंदर से होती हुई मोरवी से आगे कच्छ की ओर प्रस्थान कर गई।

1990 कि.मी. लम्बी इस ऐतिहासिक यात्रा ने संपूर्ण गुजरात में देशभक्ति का अद्भुत ज्वार पैदा किया। दऊर्वा अध्वर्यु

इस अवसर पर लोगों को सम्बोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा, "श्यामजी मांडवी से जब गए होंगे तब उनको पता भी नहीं होगा कि एक महापुरुष की तरह वे वापस आएंगे।' उन्होंने कहा, "जब श्यामजी का जन्म हुआ, उस समय भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ और जब उनकी मृत्यु हुई, उस समय गांधी जी ने दांडी यात्रा प्रारंभ की थी। यह विधि का कुछ संकेत ही था।' श्री मोदी ने कांग्रेसियों की आलोचना करते हुए कहा, "गांधी-गांधी की कांग्रेस में अंतर है। आज कांग्रेस ने हर क्रांतिवीर का अपमान किया है।' उन्होंने कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा ने विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति प्रारंभ की थी, उस छात्रवृत्ति से 1000 युवक-युवतियों ने इंग्लैण्ड में पढ़ाई की। कांग्रेस की सांसद लक्ष्मी मेनन भी उसी छात्रवृत्ति की सहायता से पढ़ी थीं। आज कांग्रेस श्यामजी से कतरा रही है। गांधी जी को भी वह भुलाना चाहती है। कांग्रेस केवल नेहरू परिवार को आगे रखना चाहती है।

श्री मोदी ने श्यामजी के जीवन को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा, "ऐसे महान राष्ट्रसपूत की अस्थियां लेने देश आजाद होते ही 16 अगस्त, 1947 को स्वयं पं. नेहरू को जाना चाहिए था। पर ऐसा नहीं हुआ।

झलकियां

थ् मांडवी शहर में ऐसा उत्सव पहली बार हुआ था, जिसमें एक लाख से अधिक जनता शामिल हुई।

थ् भुज में आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित विमानतल का उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राजीव प्रताप रूडी, मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में लोकार्पण हुआ और इस विमानतल को "क्रांतिपुत्र श्यामजी कृष्ण वर्मा विमानतल' नाम देने की घोषणा की गई।

थ् मांडवी में वीराञ्जलि यात्रा का स्वागत करने छोटी-छोटी बालिकाएं "भारत माता' के वेश में उपस्थित थीं।

थ् कांग्रेस के पूर्व विधायक जो मांडवी में रहते हैं, अपने पांच साथियों के साथ इस वीराञ्जलि यात्रा के विरोध में धरने पर बैठे। लोग कह रहे थे- "ये कांग्रेसी कब तक क्रांतिवीरों को अपमानित करेंगे...'। मांडवी क्रांति तीर्थ बनेगा, जो लोगों को राष्ट्रभक्ति की अनंत प्ररेणा देता रहेगा।' उन्होंने कहा कि यह तीर्थ कन्याकुमारी में बने विवेकानंद शिला स्मारक की तरह जनभागीदारी से बनेगा।

इस अवसर पर उपप्रधानमंत्री श्री आडवाणी ने कहा, "मैं स्वयं को धन्य मानता हूं कि इस पुनीत अवसर पर उपस्थित हूं।' श्री आडवाणी ने अस्थिकलश के बारे में की गयी टीका-टिप्पणी पर कहा, "भगवान उनको क्षमा करें। अज्ञानी व्यक्ति ही ऐसी टिप्पणी कर सकता है। ज्ञानी ऐसी बातें नहीं कर सकता।' उन्होंने सभी क्रांतिवीरों को आदर देने की बात कही। उन्होंने वीराञ्जलि यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि इस यात्रा ने लोगों में राष्ट्रभक्ति पैदा की है, जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा, "मांडवी को क्रांतितीर्थ बनाने में केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग रहेगा।' कार्यक्रम पूर्ण होते-होते मांडवी एक क्रांतितीर्थ का रूप ले चुका था। द

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