एक रामायण के रूप अनेक


रामायण कथा सबकी है और किसी की भी नहीं। मूल कथा भारत से विभिन्न दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पहुंची और वहां की संस्कृति-रीति-रिवाजों, परंपराओं में घुल-मिल गई।

मलेशिया की रामायण

थाइलैण्ड की रामायण के विषय में कहा जाता है कि यह भारत से नहीं बल्कि इण्डोनेशिया से कुछ 900 साल पहले यहां आई तथा राम-कथा के चार रूपों-खोन, लाखोन, नांग व हुन में प्रचलित हुई। "रामाकीन' या रामायण में नवजात शिशु सम्बंधी थाई व बौद्ध रिवाजों का प्रमुखता से उल्लेख है। मलेशिया में इस्लामी प्रभाव वाली रामायण "हिकायत सेरी रामा' प्रचलित है।

"फ्रा लाक फ्रा लाम (प्रिय लक्ष्मण प्रिय राम) लाओस में लोकप्रिय रामायण के तीन रूपान्तरणों में से एक है। इसमें लाओस के खान-पान, वेश-भूषा, व्यवहार तथा परंपराओं की विस्तृत जानकारी है। कह सकते हैं कि यह लाओस के जनजीवन का "समग्र वि·श्वकोष' है। म्यांमार में 11वीं शताब्दी में राजा अनावृथा का शासनकाल रामायण का प्रवेश काल माना जाता है। म्यांमार में 1973 में एक बौद्ध मठ से 80 ताड़पत्रों पर "रामा वथ्थु' नामक प्राचीन रामायण की पाण्डुलिपि मिली थी। इसके अतिरिक्त यहां अन्य पांच विभिन्न प्रकार की रामायण प्रचलित हैं। म्यांमार की रामायण में भ्रातृ-प्रेम का स्वर प्रमुख है जबकि लाओस में प्रचलित रामायण में आपसी स्नेह- सम्बंधों को रेखांकित किया गया है।

इस प्रकार प्रत्येक देश ने, जहां-जहां भी राम-कथा पहुंची, अपने देश की सामाजिक प्राथमिकताओं को दृष्टिगत करते हुए राम को कहीं भगवान के रूप में, कहीं एक रोमानी नायक की तरह, कहीं एक आदर्श पति, आकर्षक व्यक्तित्व, संयमी भाई के रूप में प्रमुखता दी है। राम की तरह सीता को भी कहीं प्रेम की देवी के रूप में प्रमुखता दी गई है, कहीं एक निष्ठावान पत्नी की, तो कहीं प्रतिशोध से भरी अर्धदेवी के चरित्र में ढाला गया है। रावण के चरित्र चित्रण में भी देश के सामाजिक परिवेश के आधार पर अंतर दिखता है। जैसे लाओस में प्रचलित रामायण में रावण या "राफनासुआन' को बुरा व्यक्ति नहीं अपितु एक चतुर, विद्वान तथा सुंदर व मोहक व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के रूप में दिखाया जाता है।

राम-कथा

जीने का

सही तरीका

सिखाती है

-फाम आन फोंग

कलाकार (वियतनाम)

वियतनाम के नृत्य विद्यालय तथा फिर रूस के लेनिनग्राद कला वि·श्वविद्यालय में प्रशिक्षण लेने वाले फाम आन फोंग 1991 से वियतनाम की "ओपेरा बैले कम्पनी' में प्रमुख नर्तक तथा नृत्य निर्देशक के रूप में कार्यरत हैं। रूस, दक्षिण कोरिया, थाइलैण्ड, चीन, इण्डोनेशिया, जापान, लाओस, ब्रिटेन और भारत में सामूहिक नृत्य प्रस्तुतियां दे चुके हैं। अन्य सदस्यों की तरह फोंग भी नृत्य समूह के सदस्यों की भिन्न पृष्ठभूमियों की चर्चा करते हैं। "क्या इन भिन्न पृष्ठभूमियों से नृत्यनाटिका के संयोजन में दिक्कत आई?' पूछने पर वे कहते हैं कि हां, विभिन्न देशों की नृत्य शैलियां अलग हैं, इसलिए कलाकारों की भाव-भंगिमाएं भी बिल्कुल अलग होती हैं। समूह के कुछ कलाकारों ने केवल अधुनिक तो कुछ ने समकालीन या फिर यूरोपीय पद्धति का नृत्य प्रशिक्षण लिया हुआ था। इसलिए भिन्न-भिन्न भाव-भंगिमाओं को मंच पर एकरूप करने में कुछ कठिनाई अवश्य आई थी। लेकिन हमने इसे चुनौती की तरह लिया और हमारा यह अभिनव प्रयोग सफल भी रहा।

फोंग के अनुसार, रामायण कथा सभी आसियान देशों में बहुत अधिक लोकप्रिय है। रामायण का मूल स्थान भारत है लेकिन भारत की तरह ही यह मलेशिया, सिंगापुर कंबोडिया, थाइलैण्ड आदि देशों की प्राचीन संस्कृति का अभिन्न अंग है।

"राम की अनुभूति' में राजा दशरथ की भूमिका अभिनीत कर रहे फोंग की नजर में भारत सांस्कृतिक संपदा का धनी देश है तथा भारतीय सौहार्दपूर्ण व्यवहार तथा आतिथ्य में कुशल हैं। रामायण की कथा का समाज की दृष्टि से क्या महत्व है? इस प्रश्न पर फोंग कहते हैं कि रामायण की कथा न केवल जीने का सही तरीका सिखाती है, बल्कि यह भी कि सहयोग की भावना हो और राह सच्ची हो तो कठिन से कठिन कार्य भी आसान बन जाता है।

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