तिथि :- २९ जनवरी २०००
»-- देवेन्द्र स्वरूप दो दृश्य-एक संदेश
»दीपावली-तीन चित्र
»साक्षात्कार
»जय होती है
»बड़ी कठिन थी रोशनी
»विदेशों में स्वयंसेवक
»75वें वर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
»अस्त्रों से नहीं,
»आकांक्षा
»अथ
»राष्ट्र का स्वाभिमान जाग्रत करें
»संघ शक्ति-देव शक्ति
»स्वयंसेवक रहा हूं, स्वयंसेवक हूं
»15 अक्टूबर को शिविर के भारत सर्वाधिक शक्ति-सम्पन्न होगा!
»आगरा में संघ के विराट स्वरूप का दर्शन
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»75 फुट ऊंचे ध्वजपोल पर जब ध्वज अटक गया तो वानर सेना के समान एक,दो,तीन,चार करते हुए एक स्वयंसेवक पोल पर चढ़ा, ध्वज ठीक किया और उतर आया। वाह! क्या बात है!!
»--टी.वी.आर. शेनाय खाड़ी के देशों को
»ऐसे लोगों को कौन भारतीय कहेगा?
»कलश भरे द्वारे-द्वारे!
»उजाले की ओर चलें...
»स्वतंत्रता सेनानियों ,शहीदों, महापुरुषों व
»राष्ट्र रक्षा महाशिविर में स्थापित नगरों में एक नगर पत्रकारों के लिए भी बनाया गया था। इसमें प्रवेश करते ही सभी पत्रकार एकबारगी तो चौंक ही जाते थे, जब वे देखते थे कि उनके स्वागत के लिए जो सज्जन बैठे हैं, वह लम्बी दाढ़ी वाले मियां जी हैं। उनका कौतुहल शांत नहीं होता तो पूछताछ शुरू हो जाती। और तब पता चलता कि वे हाजी अल्ताफ हुसैन हैं, आगरा में चश्मे की दुकान चलाने वाले एक विख्यात मुस्लिम व्यक्तित्व। और इस शिविर में अकेले हाजी अल्ताफ हुसैन ही सम्मिलित नहीं हुए, बल्कि कुल 41 मुस्लिम बंधु अपना शुल्क देकर, नामांकन करवाकर, अपना गणवेश बनवाकर और अपने खर्चे से इस शिविर में सम्मिलित हुए थे। इनमें सेआठ रसखान द्वारा पूजित कान्हा पक्के
»राष्ट्रीयता का भाव मजबूत करें
»आडवाणी ने आलोचकों का मुंह बंद किया-
»इस्लामी देशों के राजनयिकों की सरसंघचालक और भाजपा अध्यक्ष से भेंट वात्र्ताएं
»राष्ट्र का संबल है स्वदेशी
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